रोमांटिक
वह सामने बैठी थी—शांत, मगर आँखों में कुछ अनकहा। उसकी मुस्कान में अपनापन था, जैसे बरसों की पहचान हो।
वक़्त धीरे चल रहा था। नज़रों की बातों में एक खिंचाव था, पास आने की हिम्मत और रुक जाने की समझ—दोनों साथ।
उस पल में जल्दबाज़ी नहीं थी, सिर्फ़ एहसास थे। साँसों की गर्माहट, दिल की आवाज़ और एक ऐसा भरोसा, जो शब्दों से परे था।
रिश्ते की खूबसूरती तब दिखती है जब दो लोग एक-दूसरे की सीमाओं को महसूस करें। यहाँ हर क़दम सहमति से था, हर एहसास सच्चा।
खामोशी भी बोल रही थी—कि कभी-कभी सबसे गहरी नज़दीकी बिना कहे ही बन जाती है।
रात ने अपनी चादर और गहरी कर ली। यादों में बस जाने वाला एक पल, जो सुबह की रौशनी के साथ भी मुस्कुराता रहा।